हनुमान जी की वंदना करने में सर्वप्रथम अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् , प्रारंभिक श्लोक का ध्यान मंत्र पाठ किया जाता है।
Hanuman Ji Ko Mila Vardan : श्री हनुमान जी की वंदना करने में सर्वप्रथम अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् , प्रारंभिक श्लोक का ध्यान मंत्र पाठ किया जाता है। ये मंत्र बजरंगबली की शक्ति, रूप और गुणों का वर्णन करता है। हनुमान जी के अपार शक्तिवान होन के पीछे का मुख्य कारण देवीदेवाताओं से मिले वरदान है। भगवान राम के प्रति उनकी अटूट भक्ति सबसे प्रमुख हैं। इसकी प्रचीन कथा भी है।
दिव्य जन्म और शिव अवतार
पवनपुत्र हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां रुद्र अवतार माना जाता है। वे वायु देव के पुत्र हैं, जिनसे उन्हें असाधारण गति और उड़ने की शक्ति प्राप्त हुई।
श्री राम की भक्ति
उनकी शक्ति का सबसे बड़ा आध्यात्मिक स्रोत भगवान राम के प्रति उनका पूर्ण समर्पण है। माना जाता है कि “राम नाम” के जाप और निस्वार्थ सेवा से उन्हें ऐसी मानसिक और शारीरिक ऊर्जा मिलती है जो किसी भी अन्य शक्ति से परे है।
देवताओं से प्राप्त वरदान
बचपन में जब हनुमान जी सूर्य को फल समझकर खाने दौड़े, तब इंद्र देव ने उन पर वज्र से प्रहार किया। इसके बाद, वायु देव को प्रसन्न करने के लिए सभी देवताओं ने उन्हें विशिष्ट वरदान दिए
ब्रह्मा जी
किसी भी शस्त्र से न मरने और इच्छानुसार शरीर का आकार बदलने का वरदान।
इंद्र देव
वज्र से अभेद्य शरीर होने का वरदान।
सूर्य देव अपने तेज का सौवां भाग और अपार ज्ञान प्रदान किया।
वरुण और अग्नि देव
जल और अग्नि से सुरक्षित रहने की शक्ति।
यमराज
स्वस्थ जीवन और मृत्यु से अभय होने का आशीर्वाद।
अष्ट सिद्धि और नव निधि
हनुमान जी के पास अणिमा (सूक्ष्म होना) और महिमा (विशाल होना) जैसी आठ सिद्धियां और नौ निधियां हैं, जो उन्हें किसी भी स्थिति में विजयी बनाती हैं।
अमरता होने का वरदान
रामायण काल में माता सीता ने उन्हें अजर-अमर होने का वरदान दिया था, जिससे उनकी शक्तियां समय के साथ कभी कम नहीं होतीं।