Jagannath Rath Yatra 2026 : पुरी समेत देशभर में आज जगन्नाथ रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra) को लेकर उत्सव का माहौल है। भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की नगरी पुरी में स्थित श्रीमंदिर (Srimandir) में सुबह से ही विशेष तैयारी है। हर कोई महाप्रभु के दर्शन के लिए उत्सुक है।
Jagannath Rath Yatra 2026 : पुरी समेत देशभर में आज जगन्नाथ रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra) को लेकर उत्सव का माहौल है। भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की नगरी पुरी में स्थित श्रीमंदिर (Srimandir) में सुबह से ही विशेष तैयारी है। हर कोई महाप्रभु के दर्शन के लिए उत्सुक है। हिंदू कैलेंडर (Hindu Calendar) के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (Ashadha Shukla Dwitiya) को भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा निकलती है, जिसमें हर कोई शामिल होना चाहता है। इस रथ यात्रा में 3 पग चलकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। जगन्नाथ (Lord Jagannath) की कृपा से पाप, कष्ट, रोग, दुख सब मिट जाते हैं।
3 शुभ संयोग में निकलेगी रथ यात्रा
आज रथ यात्रा के शुभारंभ पर रवि योग, सिद्धि योग और भगवान विष्णु के प्रिय दिन गुरुवार का शुभ संयोग बना है। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि 15 जुलाई को 11:50 सुबह से शुरू हुई थी, जो आज सुबह 08:52 सुबह तक है, लेकिन सूर्योदय की तिथि पूरे दिन तक मान्य होती है. आज 3 शुभ संयोग में भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) अपने बड़े भाई बलभद्र जी और लाडली बहन सुभद्रा जी के साथ तीन रथों पर सवार होकर मौसी के घर गुंडिचा मंदिर (Gundicha Temple) जाएंगे। गुंडिचा मंदिर (Gundicha Temple) जगन्नाथ जी के श्री मंदिर से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
गुंडिचा मंदिर तक होती है रथ यात्रा
आज 16 जुलाई से शुरू होने वाली विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा गुंडिचा मंदिर (Gundicha Temple) तक जाती है, वहां पर तीनों भाई और बहन विश्राम करते हैं। फिर वहां से उल्टी यात्रा प्रारंभ होती है, जिसे बहुदा यात्रा कहा जाता है। ये तीनों रथ वापस श्री मंदिर आते हैं। वहां पर अनुष्ठान और रस्म निभाते हैं और फिर नीलाद्री बीजे से इस रथ यात्रा का समापन होता है। इस बार 27 जुलाई सोमवार को नीलाद्री बीजे है, उस दिन रथ यात्रा का समापन होगा।
रथ प्रतिष्ठा के बाद पाहांडी अनुष्ठान जारी
पुरी में इस समय पाहांडी अनुष्ठान जारी है। इसमें श्री मंदिर से बलभद्र जी के विग्रह को बाहर लाया गया है, उनको विधिपूर्वक उनके रथ तालध्वज पर विराजमान कराया जाएगा। फिर माता सुभद्रा और जगन्नाथ जी के विग्रह लाकर रथ पर विराजमान किए जाएंगे। उसके बाद चिता लागी रस्म निभाई जाएगी, जिसमें तीनों को आभूषण पहनाया जाएगा।
चिता लागी: दोपहर 1:30 बजे से 2 बजे तक
छेरा पहनरा: दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक
घोड़े और सारथी की स्थापना: दोपहर 3 बजे से शाम 4 बजे तक
रथ यात्रा प्रारंभ: शाम 4 बजे से