असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma) की पत्नी की तरफ से दर्ज करवाई गई एफआईआर (FIR) के मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनकी अग्रिम जमानत की याचिका हाई कोर्ट ने खारिज (Anticipatory Bail Plea Rejected) कर दी है।
नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma) की पत्नी की तरफ से दर्ज करवाई गई एफआईआर (FIR) के मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनकी अग्रिम जमानत की याचिका हाई कोर्ट ने खारिज (Anticipatory Bail Plea Rejected) कर दी है। पवन खेड़ा (Pawan Khera) ने एफआईआर (FIR) से जुड़े मामले में हाई कोर्ट का रुख किया। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि सीएम सरमा की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं। इससे पहले अदालत ने उन्हें ट्रांजिट बेल देने से इनकार किया था। पवन खेड़ा ने कोर्ट में मांग की थी कि उन्हें कुछ दिनों का समय दिया जाए ताकि वह असम की अदालत में नियमित जमानत के लिए याचिका फाइल कर सकें।
क्या थी पवन खेड़ा की दलील?
पवन खेड़ा (Pawan Khera) के वकील ने गुवाहाटी हाई कोर्ट (Guwahati High Court) में दलील दी कि कांग्रेस नेता के देश से भागने का कोई खतरा नहीं है और उन्हें गिरफ्तार करने की कोई जरूरत नहीं है। न्यायमूर्ति पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल पीठ ने दोनों पक्षों को तीन घंटे से ज़्यादा समय तक सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से खेड़ा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi) ने दलील दी कि कांग्रेस नेता के आरोपों के जवाब में मुख्यमंत्री शर्मा की टिप्पणी, खासकर राज्य में विधानसभा चुनावों के संदर्भ में राजनीतिक बदले की भावना की ओर इशारा करती है। सिंघवी ने कहा कि याचिकाकर्ता के देश से भागने का कोई खतरा नहीं है और उनकी गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं है।
‘देश से भागने का खतरा’
असम के महाधिवक्ता देवजीत लोन सैकिया (Assam Advocate General Devajit Lon Saikia) ने खेड़ा को कोई भी राहत देने का विरोध करते हुए कहा था कि यह कोई साधारण मानहानि का मामला नहीं है, क्योंकि यह मामला दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़ा है। सैकिया ने बताया कि मुख्य अपराध धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े हैं। उन्होंने दलील दी कि खेड़ा अंतरिम सुरक्षा के हकदार नहीं हैं क्योंकि उनके “देश से भागने का खतरा” है।
सीएम सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा ने गुवाहाटी अपराध शाखा थाने में खेड़ा और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामले दर्ज कराए हैं। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने पहले खेड़ा को सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने आदेश पर रोक लगा दी। बता दें कि असम विधानभा चुनाव के बीच यह मुद्दा काफी गर्म हो गया है। कांग्रेस के आरोपों के बाद सीएम सरमा ने सीधे पवन खेड़ा (Pawan Khera) को ही निशाने पर लिया था।